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Chittorgarh Fort: इतिहास प्रेमियों को स्वर्ग लगेगी यह जगह। अगर जा रहे हैं राजस्थान तो चित्तौड़गढ़ जाना ना भूलें। यहां आप चित्तौड़गढ़ किला, विजय स्तंभ, सांवरिया जी मंदिर आदि जगहों पर जा सकते हैं।

Chittorgarh Fort: राजस्थान ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदेश है। दुनिया भर के पर्यटकों के लिए समृद्ध संस्कृति से लबरेज यह राज्य आकर्षण का केंद्र है। आप भी यदि  राजस्थान घूमने जाने की सोच रहे हैं तो चित्तौड़गढ़ जाना ना भूलिएगा। इतिहास प्रेमियों को यह जगह काफी पसंद आएगी। आज के इस लेख में हम चित्तौड़गढ़ से जुड़ी कुछ बातों का जिक्र करेंगे। आईए जानते हैं की चित्तौड़गढ़ में हम कहां-कहां घूम सकते हैं। 

चित्तौड़गढ़ किला

एक समय चित्तौड़गढ़ मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की राजधानी हुआ करती थी। यहां का किला यानी कि चित्तौड़गढ़ किला घूमने के लिए सबसे मशहूर स्थानों में से एक है। यह सातवीं शताब्दी में बनाया गया था जो लगभग 700 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। कोई सटीक जानकारी तो नहीं है मगर ऐसा माना जाता है कि मोर्यवंशीय राजा चित्रांगद मौर्य ने सातवीं शताब्दी में इसे बनवाया था। 

आपको जानकर आश्चर्य होगा मगर यह मिला कोई आम किला नहीं है। दरअसल इस किले में सबसे पहला जौहर हुआ था। बताया जाता है कि रावल रतन सिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने यहां आक्रमण किया था। उस दौरान सन 1903 में रानी पद्मिनी ने अपनी 16 हजार दासियों के साथ यहां पर पहला जौहर किया था। इसी के साथ राणा विक्रमादित्य के शासनकाल में सन 1534 ईस्वी में गुजरात के शासक बहादुर शाह के आक्रमण के कारण रानी कार्णवती ने  13 हजार दासियों के साथ दूसरा जौहर किया था। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि  राणा उदय सिंह के शासन में अकबर के आक्रमण के बाद 1568 में पत्ता सिसोदिया की पत्नी फूल कंवर ने तीसरा जौहर किया था। 

विजय स्तंभ 

विजय स्तंभ को 1440 ईस्वी में महाराजा कुम्भा ने मोहम्मद खिलजी पर अपनी जीत के उपलक्ष में बनवाना शुरू किया था। और यह 1448 में जाकर पूरा हुआ था। इस स्तंभ के आंतरिक भाग में उसे समय के हथियारों, संगीत वाद्ययंत्रों और अन्य उपकरणों की नक्काशी की गई है। कहा जाता है कि जब अलाउद्दीन खिलजी ने शीशे में रानी की झलक देखी थी तो वह इसी महल में मौजूद थी। 

सांवरियाजी मंदिर 

भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह मंदिर चित्तौड़गढ़ में घूमने के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। यह मंदिर मंडफिया में स्थित है जो की चित्तौड़गढ़ से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है। अगर आप चित्तौड़गढ़ जाए तो इस मंदिर में दर्शन जरूर करें। 

कीर्ति स्तंभ 

चित्तौड़गढ़ किले के अंदर स्थित यह कीर्ति स्तंभ 12वीं शताब्दी के प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ जी के स्मारक के रूप में बना है। इस 22 मीटर ऊंचे स्तंभ का निर्माण जीजा भागरवाला, जो की एक जैन व्यापारी थे, ने रावल कुमार सिंह के शासन के दौरान बनवाया था। इसे बनाने का उनका उद्देश्य जैन धर्म का महिमा मंडन करना था।

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