Hazareshwar Mahadev Mandir: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के जिले में स्थित श्री हजारेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर अद्भुत वास्तु कला का एक शानदार प्रमाण है। यह न केवल अपनी शानदार वास्तुकला बल्कि अपने गहन धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। साल में दो बार यहां पर कुछ ऐसा होता है जिसको देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठी हो जाती है। आईए जानते हैं।
सूर्य और शिवलिंग का दिव्य संगम
दरअसल यहां पर साल में दो बार उगते सूरज की पहली किरण मंडप और गर्भ ग्रह के छोटे से दरवाजे से होकर सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। खास बात यह है कि यह कोई संयोग नहीं है। यह वास्तु कला के अनुसार काफी सावधानी पूर्वक डिजाइन करा गया है। सनातन धर्म में सूर्य को ऊर्जा के परम स्रोत के रूप में माना जाता है। साथ ही इसे सभी ग्रहों का राजा भी माना जाता है। जब सूर्य देव स्वयं भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए प्रकट होते हैं तो सभी भक्तों के बीच आध्यात्मिक परमानंद से भरा दृश्य बन जाता है। शुभ पुष्य नक्षत्र के दौरान निर्मित इसके नियम के समय के बारे में माना जाता है कि इसने मंदिर को एक अद्वितीय शक्ति से भर दिया है।
यह भी पढ़ें- Rajasthan Weather Update : राजस्थान में सूरज का प्रचंड रूप, बारिश से मिली राहत, जानें अपने शहर के मौसम का हाल
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि के शुभ दिन पर यहां पर लाखों भक्त भगवान शिव को जिला अभिषेक करने के लिए और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। मंदिर सूर्य किरण अभिषेक की दुर्लभ घटना को एक आकर्षक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यह मंदिर चित्तौड़गढ़ के चहल पहले वाले पावटा चौक के पास स्थित है। आप जब भी राजस्थान जाए इस मंदिर में दर्शन करना ना भूलिएगा। यहां भक्त शांति, आध्यात्मिक विकास और अपनी इच्छाओं की पूर्ति की तलाश करते हैं। यहां सूर्य की हर किरण भगवान शिव की शाश्वत उपस्थिति और परोपकार की याद दिलाती है ।