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Jaigarh Kila: जयगढ़ किला को खासतौर पर खजाना छुपाने के लिए बनवाया गया था, इतिहास में अपनी भव्यता और रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित सवाई जयसिंह द्वारा बनाई गई दुनिया की सबसे बड़ी तोप, जयवाण के साथ जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है।

Jaigarh Fort: भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जयगढ़ किले से अरबों का सोना निकलवाया था। इस किले का निर्माण खासतौर पर खजाना छुपाने के लिए ही करवाया गया था। जयगढ़ किले के जयवाण परिसर में दुनिया की सबसे बड़ी तोप है, जिसे सवाई जयसिंह द्वारा बनवाया गया था। कहा जाता है कि इस तोप का निर्माण केवल एक बार ही हुआ है, जब पहली बार तोप को चलाया गया था, उस दौरान तोप का गोला एक चाकसू नामक जगह पर जाकर गिरा, वहां एक बड़ा गड्ढा हो गया था। बाद में राजा ने उस गड्ढे वाले जगह पर एक तालाब बनवा दिया, जो आज भी गोलीराव तालाब के नाम से प्रसिद्ध है।

मानसिंह का छुपा खजाना

कहा जाता है कि राजा मानसिंह अफगानिस्तान से जो सोना लाए थे, वह सोना उन्होंने जयगढ़ किले में छुपा कर रखा था। जयगढ़ किले के अंदर पानी के कुछ टंकी बनवाई गईं थी। पानी की टंकी के अंदर कमरों में खजाने को छुपाया गया था। कहा जाता है कि बाद में सरकार ने इस खजाने को निकालवा कर जयपुर शहर की नींव रखी।

राजा मानसिंह का छुपा था खजाना

इस किले में छुपे खजाने को लेकर कहा जाता है कि एक बार राजा मानसिंह अकबर के कहने पर काबूल गए थे। वहां की आवाम लुटेरे सरदारों से काफी परेशान थी। राजा मानसिंह ने सरदारों से लड़ाई कर उनको हरा दिया। इस लड़ाई में सरदारों को हराकर राजा मानसिंह ने बीरबल का भी बदल लिया था। लुटेरे सरदारों के पास कई टन सोना हो गया था, जिसे मानसिंह अपने साथ ले। सरदारों ने खजाने को मुगलों को ना सौंप कर आमेर के किले में छुपा दी।

बाद में सरकार को इस खजाने के बारे में पता लगा कि जयगढ़ किले के नीचे विशाल सात पानी की टंकियां बनी है। मानसिंह ने खजाना यहीं छुपाया था। इस खजाने की चर्चा पहली बार 1976 में हुई। उस वक्त जयपुर राजघराने की प्रतिनिधि महारानी गायत्री देवी थी। गायत्री देवी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की विरोधी थी। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी और गायत्री देवी में काफी लंबी समय से ठनी हुई थी।

खोज, विवाद और छुपी हुई संपत्ति

1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। इस आपातकाल में सरकार ने अपनी खूब मनमानी की। आपातकाल की आड़ में केंद्र सरकार ने गायत्री देवी को जेल में डाल दिया। उन पर विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन का आरोप लगाया गया। इसके बाद इंदिरा गांधी के आदेश पर जयगढ़ किले में आयकर विभाग वालों ने छापा मारा। इस काम में सेना और पुलिस की भी मदद ली गई थी, 3 महीने तक इस खजाने की खोज जारी रही थी।

गायत्री देवी के बार-बार मना करने पर भी सरकार ने इस किले को बहुत नुकसान पहुंचाया था। 3 महीने की खोज के बाद इंदिरा गांधी ने खजाना न मिलने की घोषणा की। पर यह बात लोगों ने नहीं मानी, क्योंकि जिस दिन खुदाई का काम बंद हुआ उसके अगले दिन ही जयपुर दिल्ली हाईवे आम जनता के लिए अचानक ही बंद कर दिया गया। माना जाता है कि सरकार को यहां से काफी संपत्ति मिली थी, जो की ट्रैकों में भरकर दिल्ली पहुंचाई गई।

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