Jaigarh Fort: राजस्थान का आकर्षण न केवल यहां की संस्कृति या फिर शानदार व्यंजनों में है बल्कि यहां के शानदार किलें और महलों में भी है, जो यहां की वीरता और शाही वैभव की गाथा गाते हैं। इन्हीं में शामिल है जयगढ़ का किला। यह किला इतिहास और रहस्य से भरा हुआ है। आईए जानते इस किलें से जुड़ी हुई कुछ रोचक बातें।
जयगढ़ किला और इसका इतिहास
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी की शुरुआत में इस किले का निर्माण कराया था। यह किला मूल रूप से पास के आमेर के किले को दुश्मनों के हमले से बचने के लिए एक दुर्जेय गढ़ के रूप में बनाया गया था। चील के टीले पर स्थित यह किला आसपास के सभी नजरों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है।यह किला रणनीतिक रूप से एक सैन्य गढ़ के रूप में काम करता था।
यह भी पढ़ें- Rajasthan High Court: सरकारी कर्मचारियों के निलंबन को लेकर कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, जारी किए दिशा-निर्देश
विजय किले के नाम से जाने वाला यह है किला मुगल काल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। यहां पर कई तोप और युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार रखे थे। यहां की खास बात यह है कि यहां पर दुनिया की सबसे बड़ी पहिएदार तोप, जयबाण तोप रखी है। हालांकि यह तोप कभी भी युद्ध में इस्तेमाल नहीं हुई लेकिन ताकत और तकनीकी कौशल का प्रतीक जरूर है।
छिपे हुए खजाने का रहस्य
इस किले की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक यह है कि यहां पर एक तोप के पीछे एक विशाल जल कुंड है। लोगों का कहना है कि कछवाहा राजवंश ने एक बार जयगढ़ किले को अपने धन के लिए एक सुरक्षित भंडार स्थल के रूप में इस्तेमाल किया था और उन्होंने पानी की टंकी के नीचे एक गुप्त कक्षा में अफगानिस्तान और भारत दोनों की विभिन्न रियासतों से लूटा हुआ खजाना छुपाया हुआ है। हालांकि समय बीतने के साथ-साथ भी इस संभावित खजाने के पीछे के सच्ची कहानी की पुष्टि नहीं हो पाई है।
हालांकि जयपुर से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह किला अब पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। अगर आप भी कभी जयपुर जाए तो यहां जाना मत भूलिएगा।