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Rajasthan Ghoonghat Pratha लक्ष्मी कुमारी चुंडावत राजस्थान की पहली महिला जिन्होंने पर्दा प्रथा के विरुद्ध जमकर आवाज उठाई और फिर राजनीति में अपने कदम रखे।

Rajasthan Ghoonghat Pratha : राजस्थान समेत भारत में कई ऐसे राज्य है जहां आज भी महिलाएं घुूघट में रहती हैं, हालांकि इसे हम परंपरा या फिर रीति रिवाज मनाते हैं। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि महिलाओं को घूंघट इसलिए करनी चाहिए ताकि पुरुषों की बुरी नजर से बच सके। लेकिन, राजस्थान की एक ऐसी महिला थी। जिन्होंने पर्दा प्रथा के विरुद्ध जमकर आवाज उठाई और फिर राजनीति में अपने पैर रखे।

यही नहीं वो कांग्रेस के तरफ से चार बार विधानसभा चुनाव जीतीं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी संभाल। जब पहली बार चुनाव में खड़ी हुई तो धमकियां भी मिली लेकिन धमकियों का डटकर सामना किया । और विधानसभा का सदस्य बनी। राजस्थान की पहली लेखिका भी रही जिन्होंने अपने जीवन काल में 45 किताबें लिखी। 

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दहेज में जेवर नहीं किताबों की अलमारी

लक्ष्मी कुमारी चुंडावत का विवाह 17 वर्ष की उम्र में रावतसर ठिकाने के रावत तेज सिंह के साथ हुआ जो तत्कालीन बीकानेर के चार प्रमुख में से एक थे। चुंडावत दहेज में किताबों की अलमारी भी साथ लें गई। लक्ष्मी कुमारी चुंडावत को लिखने और पढ़ने का शौक बचपन से ही था। वो बताती थी कि वो भाग्यशाली थी । उनकी मां उनके साथ दिया करती थी जिसके बदौलत वो किताबें मंगा के  पढ़ा करती थीं।

चुंडावत के राजनीतिक जीवन

पिता और पति के प्रोत्साहन से चुंडावत ने 1962 की राजनीति में अपने कदम बढ़ाए। चुंडावत राजस्थान की पहली महिला राज्य नेताओं में से एक है। 1962,1967 और 1980 के सक्रिय राजनीति में कांग्रेस के टिकट पर खड़ी हुई। भीम, देवगढ़ से तीसरी, चौथी और सातवीं राजस्थान विधानसभाओं के सदस्य रहीं। चुंडावत ने राजस्थान को राज्य भाषा बनाने के लिए लगातार प्रयास किए। राजस्थानी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

चुंडावत की प्रमुख रचनाएं
चुंडावत ने अपने जीवन काल में लगभग 45 किताबें लिखी। जिनमें से उनकी प्रमुख रचनाएं राजस्थान की लोक कथाएं,मूमल, संस्कृति राजस्थान, देवनारायण बगड़ावत महागाथा आदि पुस्तकें रहीं।

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