Rajasthan News: राजस्थान को स्वच्छ बनाने के लिए भजनलाल सरकार की ओर से अहम फैसला लिया गया है। अब शहरी नगर निकायों की तरह ही प्रदेश के ग्राम पंचायतों का भी स्वच्छता मूल्यांकन किया जाएंगा। आपको बता दें कि हर साल केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से प्रदेश के शहरों की स्वच्छत रैंकिंग जारी की जाती है।
11 हजार के अधिक ग्राम पंचायतों का होगा मूल्यांकन
जारी आदेश के मुताबिक अब राज्य के 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों की स्वच्छता का मूल्यांकन किया जाएंगा। मूल्यांकन से पहले ग्राम पंचायत में सफाई और कचरा प्रबंधन का कार्य किया जाएंगा। इसमें सबसे बड़ी चुनौती प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की है, जिसके लिए प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई को भी स्थापना किया जाएगा।
इससे ग्राम पंचायत का कचरे में से प्लास्टिक अलग हो जाएगा। एक बार जब हर जगह सफाई हो जाएंगी उसके बाद ही मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएंगी। ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता के लिए प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर खास जोर दिया जाएंगा।
इसके लिए अधिक संख्या वाले स्थानों जैसे पर्यटन स्थल, सार्वजनिक जगहें, धार्मिक स्थलों आदि पर भी 15 जनवरी तक प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाइयों की स्थापना करने के लिए आदेश दिए गए है।
प्लास्टिक का उपयोग रोकने पर होगा जोर
ग्रामीण इलाकों में लगने वाले मेलों, सामाजिक कार्यक्रमों, पदयात्राओं में यूज होने वाली प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का कार्य किया जाएंगा। इसके लिए खानें में प्लास्टिक प्लेट ना इस्तेमाल करने बल्कि स्टील के बर्तनों में खानें के लिए अभियान भी चलाया जाएंगा। अभियान के दौरान गांवों में बर्तन बैंक स्थापित किए जाएंगे।
प्रदेश में स्वच्छता के लिए 11200 ग्राम पंचायतों में टेंडर जारी किए जा रहे है। इनमें से 3495 में कार्यादेश जारी हो चुके है, वहीं 10689 में कार्य किया जा रहा है। साथ ही 2046 ग्राम पंचायतों में टेंडर प्रक्रिया का कार्य शुरू हो गया है।