Rajasthan News: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार किसानों को सशक्त करने की दिशा में कई तरह के प्रयास कर रही है, इसी क्रम में किसानों को फसल की सिंचाई के लिए संसाधन मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा सरकार उपज पर तय रकम भी अदा कर रही है। इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एसपी का नाम दिया जाता है।
अब चुकी बारी है गेहूं फसल के काटने की तो सरकार किसानों को गेहूं पर भी भर-भर कर भुगतान कर रही है, हालांकि किसानों को बिक्री के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। इसके लिए 25 जून तक की तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में लिए हम आपको उस तय प्रक्रिया के बारे में बताते हैं जिसके तहत किसान राजस्थान के सरकारी मंडियों में जाकर अपने गेहूं की फसल बेच सकता है।
गेहूं बिक्री के लिए किसान कराएं रजिस्ट्रेशन
राजस्थान के किसान गेहूं फसल की बिक्री के लिए सरकारी मंडियों में जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, रजिस्ट्रेशन की ये प्रक्रिया 25 जून 2025 तक चलेगी, वहीं गेहूं की खरीद 30 जून तक सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान भजनलाल शर्मा सरकार किसानों को एक क्विंटल गेहूं पर 2575 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य अदा करेगी।
किसान mspproc.rajasthan.gov.in की आधिकारिक साइट पर जाएं और अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें, इस साइट पर मांगे गए सभी डिटेल को किसान ध्यान से भरें और पंजीकरण कर गेहूं बिक्री करने की योग्यता को अपनाएं। ऐसा करने के बाद किसान चाहें तो सरकारी मंडियों में जाकर अपनी गेहूं की उपज बेच सकते हैं और सरकार की ओर से भुगतान पा सकते हैं।
किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध सरकार
राजस्थान सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है, इसके अनेकों उदाहरण है। सरकारी मंडियों में 2575 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी जा रही गेहूं की फसल उनमें से एक है। बता दे कि राजस्थान में गेहूं की फसल अच्छी मात्रा में बोई जाती है, बहुतायत किसान ऐसे भी जिनकी आजीविका कृषि पर ही निर्भर होती है।
किसानों को गेहूं के बदले प्रति क्विंटल के हिसाब से 2575 रुपए का भुगतान करना भजनलाल सरकार की एक बड़ी सौगात है, इस धनराशि की मदद से किसान अपनी आजीविका से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरी कर सकता है। इसके अलावा वह भविष्य में कृषि संबंधी कार्यों के लिए लगने वाले धनराशि का इंतजाम भी इन्हें पैसों से कर आगे की खेती बाड़ी कर सकता है जिससे वो आर्थिक रूप से अपना सशक्तिकरण सुनिश्चित कर सकेगा।
ये भी पढ़ें: गांव वालों के लिए वरदान साबित हुआ रास्ता खोलो अभियान, बरसों से बंद पड़े 863 रास्ते खोले गए