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Jaipur buildings sealed: राजस्थान के जयपुर शहर में हाइकोर्ट ने 19 बिल्डिंगों को सील करके उन्हें खाली करने के आदेश दिए है। इस आदेश के व्यापारियों के हड़कंप मचा हुआ है।

Rajasthan High Court News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के 19 व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स पर कारवाई का मामला अब ज्यादा उलझता जा रहा है। हाइकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अवैध घोषित 19 चिन्हित बिल्डिंगों को सील करके पालना रिपोर्ट को 11 मार्च तक कोर्ट में पेश किया जाए। साथ ही नगर निगम भी हेरिटेज प्रशासन की ओर से सीलिंग के लिए दिए गए नोटिस के बाद सभी व्यापारियों ने अपना संगठन बना लिया है। धुला हाउस, हल्दियों के रास्ते पर 500 से ज्यादा व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करके प्रतिष्ठान बंद कर दिए हैं। इसके अलावा प्रशाशन को अपनी आवाज पहुंचाने के लिए सभी व्यापारी नगर निगम हेरिटेज मुख्यालय में इकठ्ठा हो गए हैं।

क्या कहता है हाइकोर्ट

हाइकोर्ट के फैसले के बाद अब नगर निगम हेरिटेज प्रशासन ने भी परकोटा क्षेत्र में बिल्डिंग बायलॉज के विरुद्ध 19 व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को नोटिस दे दिया है। यह पूरा मामला हेरिटेज क्षेत्र के हल्दियों का रास्ते, दडा मार्केट और मनीरामजी की कोठी का है। निगम प्रशासन के कोठी में रहने वाले सभी लोगों को साथ मार्च तक कोठी खाली करने का आदेश दिया है। नोटिस में कहा गया है कि कोठी में रहने वाले लोग अपना सामान 7 मार्च तक निकाल लें और अगर सामान नहीं निकाला जाता है तो, निर्माण को सील कर दिया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद धुला हाउस और हल्दियों का रास्ता में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। व्यापारी नगर निगम हेरिटेज मुख्यालय पहुंचकर न्याय की मांग कर रहे हैं। 

बिल्डिंगों में 900 से ज्यादा व्यापारी 

निगम के नोटिस दिए जाने के बाद व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के व्यापारियों में डर का माहौल बना हुआ है। अनुमान है कि कॉम्प्लेक्स में 900 से ज्यादा व्यापारी हो सकते हैं। व्यापारियों के अनुसार जयपुर में नीचे दुकान और मकान बनाने का कांसेप्ट बहुत पुराना है। निगम ने अवैध बिल्डिंगों को नोटिस दिया है। जिनके रेजिडेंशियल इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी होने का पता चला है। इस पर व्यापारी कह रहे हैं कि यह कमर्शियल काम पिछले 75 सालों से हो रहा है। 

व्यापारियों ने सुनाई अपनी जुबानी

उनका कहना है कि 19 कॉम्लेक्स में तकरीबन 900 से ज्यादा व्यापारियों के अंडर हजारों वर्कर्स काम कर रहे हैं। निगम को हम हर साल UD टैक्स भी देते हैं। साथ ही सब व्यापारी GST भी देते हैं। सभी बिल्डिंग बरसो से ऐसे ही खड़ी हुई हैं। जिसमें हजारों व्यापारी काम करते हैं। अगर निगम इन बिल्डिंगों को सीज करता है तो, इसका सीधा असर वर्कर्स के परिवारों और उनकी आमदनी पर पड़ेगा। नगर निगम के नोटिस देने के बाद भी बिल्डिंगों में व्यावसायिक गतिविधियां जारी हैं।

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