CNG-PNG: राजस्थान में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्राकृतिक गैस कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार को नहीं पाइपलाइन परियोजना के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड द्वारा मंजूरी मिल गई है। आईए जानते हैं पूरी खबर।
इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल में शहर में पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन में एसवी 4007 स्टेशन से जोधपुर के काकानी तक 83 किलोमीटर लंबी 8 इंच डायमीटर वाली स्टील सफर पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत लगभग 120 करोड रुपए है। इसका उद्देश्य मेहसाणा भटिंडा ट्रक पाइपलाइन से प्राप्त सीएनजी और पीएनजी सहित प्राकृतिक गैस को सीधे जोधपुर तक पहुंचना है। दर्शन पहले करीब 675 किलोमीटर दूरी से 12 से 14 क्रायोजेनिक टैंकरों की मदद से सीएनजी पीएनजी मंगवाई जा रही थी। अभी परियोजना के बाद यह दूरी कम हो जाएगी और साथ ही वित्तीय और अन्य चीजों पर भी फायदा मिलेगा।
स्थानीय विकास पर जोर
खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रधान सचिव टी रविकांत ने कहा कि, "परियोजना का रणनीतिक महत्व अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट किस स्थान और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना है। साथ ही पाइपलाइन प्रमुख राजमार्गों से जुड़ेगी जिससे क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क और ज्यादा बढ़ेंगे और साथ ही स्थानीय आर्थिक विकास भी होगा।"
क्या क्या लाभ मिलेंगे
सबसे पहले तो सीधी पाइपलाइन कनेक्टिविटी लंबी दूरी की गैस परिवहन से जुड़े जोखिमों को काम करेगी। इसी के साथ उद्योग और घरेलू ऊर्जा जरूरत हो के समर्थन के साथ बेहतर गैस आपूर्ति की जाएगी जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। पाइपलाइन आधारित डिलीवरी में शिफ्ट होना राज्य के टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा समाधान के प्रति कमिटमेंट को दर्शाएगा।
ये भी पढ़ें:- Rajasthan Government Schools: सरकारी स्कूलों में अब दिया जाएगा वेदों का ज्ञान, बच्चों की किताबों में होगा बदलाव