Rajasthan Tourism: रेगिस्तानी राज्य के नाम से मशहूर राजस्थान, मानसून में हरियाली और सुंदरता का अनोखा संगम पेश करता है। अरावली की हरी-भरी पहाड़ियां और ताजगी से भरा वातावरण यहां की छवि को पूरी तरह बदल देते हैं। यही कारण है कि मानसून का समय राजस्थान घूमने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। अगर आप अपनी अगली यात्रा राजस्थान में करने की सोच रहे हैं, तो यह स्टोरी आपके लिए है। इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि आप सिर्फ 10 दिनों में राजस्थान घूमने का प्लान कैसे कर सकते हैं।
पहला दिन, आमेर का अनोखा अनुभव
अपनी यात्रा की शुरुआत राजस्थान की राजधानी जयपुर से करें। हवाई, रेल या सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचना बेहद आसान है। समय की बचत के लिए आमेर महल के पास किसी होटल में ठहरने की योजना बनाएं। चेक-इन के बाद, आमेर के प्रमुख आकर्षणों जैसे आमेर किला, पन्ना मीना का कुंड और जगत शिरोमणि मंदिर का भ्रमण करें। सुबह जल्दी निकलने पर आप इन स्थलों का विस्तार से आनंद ले सकते हैं। दिनभर की यात्रा के बाद आमेर में ही विश्राम करें, ताकि अगली सुबह तरोताजा होकर जयपुर शहर के बाकी पर्यटन स्थलों की खोजबीन कर सकें।
दूसरा दिन, जयपुर की शाही विरासत
दूसरे दिन की शुरुआत जयपुर शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण से करें। इनमें सिटी पैलेस, जंतर-मंतर, हवा महल और अल्बर्ट हॉल म्यूजियम जैसी जगहें शामिल हैं। गुलाबी नगरी के शाही बाजारों में खरीदारी करते हुए स्थानीय संस्कृति का आनंद लें। यदि आपने आमेर में रात बिताई थी, तो सुबह जल्दी जयपुर पहुंचना आसान होगा। दिनभर के रोमांच के बाद शाम को पुष्कर के लिए प्रस्थान करें, जो जयपुर से करीब दो-ढाई घंटे की दूरी पर है। रात में पुष्कर पहुंचकर वहां रुकें और अगले दिन की यात्रा के लिए तैयार हो जाएं।
तीसरा दिन, पुष्कर की पवित्रता
तीसरे दिन की शुरुआत पवित्र नगरी पुष्कर से करें। विश्व के एकमात्र ब्रह्मा मंदिर में दर्शन करें और पुष्कर सरोवर में स्नान करके आध्यात्मिक शांति का अनुभव लें। इस धार्मिक नगरी की गलियों में घूमते हुए सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक धरोहर का आनंद लें। सुबह की यात्रा के बाद दोपहर में लंच करें और बीकानेर के लिए रवाना हों। पुष्कर से बीकानेर तक का सफर करीब 4-5 घंटे का है, जिसे पूरा कर आप शाम तक बीकानेर पहुंचकर वहां आराम कर सकते हैं।
चौथा दिन, बीकानेर की धार्मिकता और सांस्कृतिक धरोहर
चौथे दिन की शुरुआत बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित करणी माता मंदिर से करें, जो अपनी असंख्य चूहों के कारण 'चूहों का मंदिर' के नाम से प्रसिद्ध है। यहां माता के दर्शन के बाद, बीकानेर के प्रमुख आकर्षणों में से एक जूनागढ़ किले का भ्रमण करें, साथ ही अन्य हवेलियां और स्थानीय कला का आनंद लें। बीकानेर में घूमते हुए आपको राजस्थानी संस्कृति की एक सुंदर झलक भी देखने को मिलेगी। इन स्थलों को देखने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, और इसके बाद आपको करीब 4 घंटे की ड्राइव से शाम तक जैसलमेर पहुंचना होगा।
पांचवां दिन, जैसलमेर का रेत और सूर्यास्त
बीकानेर से करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करके आप चौथे दिन शाम तक आप जैसलमेर में होंगे, यहां आपको 2 दिन रुकने की प्लानिंग करनी है। जैसलमेर में ठहरने के लिए आप डेजर्ट कैंप की बुकिंग कर लें, जो आपको पूरा पैकेज प्रदान करेगा। इस दिन जैसलमेर के किले और हवेलियों के दर्शन के साथ-साथ गड़ीसर झील से सूर्यास्त का नजारा देखने का भी आनंद लें, जो बेहद मनमोहक होता है। शाम को, सैम सैंड डून्स में स्थित डेजर्ट कैंप में रात बिताना न केवल आरामदायक बल्कि एक शानदार अनुभव साबित होगा। यहां की संस्कृति, रेत और ठंडी रातें आपकी यात्रा को यादगार बना देगी।
छठा दिन, जैसलमेर से जोधपुर का सफर
जैसलमेर में डेजर्ट कैंप में बिताई रात के बाद, छठे दिन की सुबह रेगिस्तानी टीलों पर जीप सफारी और ऊंट सफारी का अनुभव जरूर करें। इन सफारियों के दौरान आप इन खूबसूरत टीलों की फोटोग्राफी भी कर सकते हैं, जो आपके कैमरे में अद्भुत यादें कैद कर देगी। इसके बाद, कैंप से चेक आउट करके आप जोधपुर के लिए रवाना होंगे, जो लगभग 260 किलोमीटर दूर है और इसमें आपको करीब 4 से 4.5 घंटे का समय लगेगा।
जोधपुर पहुंचने पर होटल में चेक-इन के बाद आप शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अगर समय मिले तो जोधपुर से 17 किलोमीटर दूर स्थित मंडोर गार्डन भी जाएं, जहां ऐतिहासिक संग्रहालय, मंदिर, सुंदर फव्वारे और फूडकोर्ट का आनंद ले सकते हैं।
सातवां दिन, जोधपुर से माउंट आबू का सफर
सातवें दिन, यदि आप जोधपुर की सभी जगहें नहीं देख पाए हैं, तो ब्रेकफास्ट के बाद जोधपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा करें और फिर सूर्य नगरी जोधपुर को अलविदा कहें। जोधपुर से माउंट आबू की यात्रा करीब 250 किलोमीटर दूर है और रास्ते की स्थिति अच्छी होने के कारण सफर आरामदायक रहेगा।
माउंट आबू पहुंचने में करीब 4.5 घंटे का समय लगेगा। यहां पहुंचकर होटल में चेक-इन करने के बाद शाम के वक्त नक्की झील में बोटिंग और अन्य पानी की एक्टिविटीज का आनंद लेते हुए बिताएं। माउंट आबू, राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन होने के कारण अन्य पर्यटन स्थलों की सैर भी करने का मौका मिलेगा। हम आपको सलाह देंगे कि गुरु शिखर की यात्रा आप अगली सुबह जल्दी करें, ताकि आप बिना भीड़ के अरावली पर्वतमालाओं के सबसे ऊंचे बिंदू पर शांति से समय बिता सकें।
आठवां दिन, गुरु शिखर से उदयपुर का सफर
आठवें दिन माउंट आबू में गुरु शिखर पर जाएं, जो अरावली पर्वतमालाओं का सबसे ऊंचा बिंदू है। यहां की ताजगी से भरी हवाओं के साथ आपको बेहद सुखद अनुभव होगा। गुरु शिखर तक पहुंचने के लिए 20-30 मिनट सीढ़ियां चढ़नी होती हैं, लेकिन खाने-पीने की कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि रास्ते में कई रेस्टोरेंट्स उपलब्ध हैं। इसके बाद, माउंट आबू से चेक आउट करके आप उदयपुर के लिए निकल सकते हैं, जो केवल 160 किलोमीटर दूर है और आपको करीब 3 घंटे लगेंगे।
उदयपुर पहुंचकर होटल में चेक-इन करें और फिर शाम को झीलों की नगरी में शॉपिंग करें या मानसून के दौरान सज्जनगढ़ पैलेस (मानसून पैलेस) जाएं। यहां से चारों ओर का दृश्य आपको मंत्रमुग्ध कर देगा, जो मानसून के मौसम में और भी खास होता है।
नौवां दिन, उदयपुर की झीलों और ऐतिहासिक स्थलों की सैर
नौवे दिन, उदयपुर की झीलों की नगरी में समय बिताते हुए आप कई खूबसूरत पर्यटन स्थलों का दौरा करेंगे। उदयपुर की झीलों में पानी की विभिन्न गतिविधियों का आनंद लें और सिटी पैलेस के अद्भुत दृश्य का अनुभव करें, जो जीवनभर आपके यादों में रहेगा। इसके अलावा, उदयपुर में स्थित प्राचीन मंदिर और हवेलियां आपकी यात्रा को और भी खास बना देगी। दिनभर की यात्रा के बाद, कोशिश करें कि शाम का समय पिछोला झील के किनारे बिताएं, जहां शांत वातावरण और खूबसूरत दृश्य आपके दिल को सुकून देंगे।
दसवां दिन, उदयपुर से घर वापसी
अगर आप नौवें दिन उदयपुर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा नहीं कर पाए, तो दसवें दिन उनका पूरा आनंद लेकर आप अपनी राजस्थान यात्रा का समापन करेंगे। इस दिन आप उदयपुर से अपने शहर की ओर प्रस्थान करेंगे, और इस शानदार 10 दिनों की यात्रा की यादों के साथ घर लौटेंगे। राजस्थान की यह यात्रा न केवल आपको ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराएगी, बल्कि इसके खूबसूरत नजारों और अनुभवों को आप जीवनभर याद रखेंगे।