Festivals Of Rajasthan: राजस्थान, जिसे मारवाड़ियों की नगरी कहा जाता है, यह अपने रंगीन त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है। इनमें से एक प्रमुख त्योहार है गणगौर पर्व, जो भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती को समर्पित होता है। यह त्योहार न केवल राजस्थान में बल्कि उन सभी प्रदेशों में मनाया जाता है जहां मारवाड़ी रहते हैं।
गणगौर पर्व का महत्व
- गणगौर पर्व 17 दिनों तक चलता है, जिसमें कुंवारी लड़कियों और महिलाओं का विशेष योगदान होता है।
- यह त्योहार होली के दूसरे दिन से शुरू होता है और चैत्र शुक्ला तृतीया तक चलता है।
- इस दौरान लड़कियां और महिलाएं प्रतिदिन प्रातः काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं।
- कुंवारी लड़कियां व्रत रखती हैं और शादीशुदा महिलाएं अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती हैं।
- इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है क्योंकि यह पति-पत्नी के प्रेम और सुहाग की प्रतीक है।
गणगौर पूजा की विधि
- गणगौर पूजने वाली युवतियां होली दहन की राख लाकर उसके आठ पिण्ड बनाती हैं।
- इन पिण्डों को दूब पर रखकर प्रतिदिन पूजा की जाती है और दीवार पर एक काजल व एक रोली की टिका लगाती हैं।
- शीतलाष्टमी तक इन पिंडों को पूजा जाता है।
- इसके बाद मिट्टी से ईसर गणगौर की मूर्तियां बनाकर उन्हें पूजा जाता है।
जयपुर में गणगौर उत्सव
- जयपुर में गणगौर उत्सव दो दिनों तक बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
- इस दिन सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी रहती है।
- गणगौर की सवारी अकेले ही निकाली जाती है, जो एक विशेष परंपरा है।
- माता को घेवर का भोग लगाया जाता है और जल पिलाया जाता है।
गणगौर मेले की शुरुआत
- 1962 में विवेकानंद पार्क के सामने गणगौर मेला लगा था।
- 1967 में पहली बार जयपुर से काठ की गणगौर-ईसर जी की प्रतिमा लाई गई थी।
- 1974 से गणगौर महोत्सव में राजस्थानी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
इस प्रकार, गणगौर पर्व राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्रेम, सुहाग, और पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाने का संदेश देता है।