Steam Engine in Pali: राजस्थान का पाली जिला जोधपुर दरबार की घास कटाई का मुख्यालय हुआ करता था। यहां से घास जोधपुर लांसर्स की घोड़ों के खाने को ले जाई जाती थी। यहां से घास ले जाने के लिए अंग्रेज एक भाप के इंजन का उपयोग करते थे। कई लोगों को इतिहास की ऐसी चीजें दिखने की इच्छा होती है। वहीं इस भाप के इंजन को अभी भी आप देख सकते हैं।
पाली में देख सकते हैं भाप का इंजन
आज भी पाली में इसे देखा जा सकता है। आमजन को इतिहास और प्रक्रिया समझाने के उद्देश्य से इस 200 साल पुराने इंजन को रिनोवेट कराया गया है। उसके बाद वन विभाग के कार्यालय के बाहर डिस्प्ले किया गया। जहां कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से देख पाएगा।
अंग्रेज का खास इंजन
दअरसल, पाली एक समय में जोधपुर दरबार की घास प्रोसेसिंग का मुख्यालय था, यहां जितनी भी घास काटी जाती थी वह जोधपुर महाराजा के जोधपुर लांसर्स की घोड़ों की यूनिट की फीड के लिए जाती थी। इस घास काटने के लिए मशीन दूसरे ब्लॉक से आती थी। ये भाप का इंजन इसी काम में आता था।
जंगल में जंग खा रहा था इंजन
अंग्रेजों के जमाने का यह भाप वाला इंजन पाली के जंगलों में जंग खा रहा था। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं जब इसमें हमारी नजर पड़ी तो इसे जिला मुख्यालय लाया गया। जिसका रिनोवेट कर कार्यालय के सामने डिस्प्ले कर दिया गया।
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किसने बनाया था ये इंजन
इंग्लैंड की जेसप कंपनी ने रैनसम सिम्स एंड जेफरीज स्टीम थ्रैशिंग मशीन को निर्मित किया था। इस इंजन की लंबाई लगभग 7-8 फीट, चौड़ाई लगभग 2-3 फीट, ऊंचाई लगभग 8-10 फीट है। पाली के वन विभाग ने पीपीएल कंपनी के साथ मिलकर इस भाप वाले इंजन को रिनोवेट करवाया है। पाली केइतिहास को समझने के लिए और इस इंजन को देखने लिए लोग बहुत दूर -दूर आ रहे हैं।