Unique Farming Technique: चिड़ावा से लगभग 10 किमी की दूरी पर स्थित पिलानी रोड पर देवरोड़ पंचायत के स्थानीय लोगों ने भी इस प्रकार की तकनीकी को खेती में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कम पानी से पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और भूजल बचाने के लिए यह एक अहम कदम है। इस तकनीक की मदद से पहले एक लीटर पानी से पौधे उगाए जाते है उसके बाद बारिश के पानी से सिंचित कर उसकी नमी से पौधे को पानी दिया जाता है।
अब तक लगा चुके है डेढ़ लाख पौधे
किसान सुंडाराम वर्मा अब तक इस तकनीक से एक लीटर पानी से ही लगभग डेढ़ लाख से अधिक पौधे लगा चुके है। सीकर, चूरू, झुंझुनूं समेत पूरे राज्य में उन्होंने यह पौधे लगवाए है। कई लोग उनके पास इस अनोखी तकनीक से जुड़ी जानकारी लेने भी आते है। सुंडाराम ने बताया कि लगातार भूजल स्तर गिरता जा रहा है, ऐसे में कम पानी से खेती करना बेहद जरूरी है।
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आठ हेक्टेयर में उगाए पौधे
देवरोड गांव के मुक्तिधाम की आठ हेक्टेयर जमीन में उन्होंने अब तक कुल 7500 पौधे उगाए है। इससे पहले यह जमीन झाड़-झंखाड़ से भरी हुई थी। 2023 में स्थानीय लोगों ने मिलकर उसे समतल करवाया व 25 लाख रुपए की लागत से चारदीवारी का निर्माण कराया। साथ ही एचडीएफसी बैंक की मदद से शीशम, नीम, लेसूवा, पीपल व बड़ के पौधे भी रोपे गए, जो फिलहाल 8 से 10 फीट ऊंचाई तक बढ़ चुके हैं।
एक लीटर पानी से कैसे हो जाती है खेती?
नई दिल्ली के पूसा कृषि संस्थान में ड्राई फार्मिंग तकनीक की पढ़ाई कर चुके किसान सुंडाराम वर्मा ने बताया कि इस तकनीक से बारिश के पानी की मनी को जमीन में संरक्षित रखा जाता है। सबसे पहले बारिश के पानी को जमीन में संचित करते है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद खरपतवारों की जड़ों व छोटी नलिकाओँ से जल बाहर निकलता है। यह पानी भाप बनकर उड़ जाता है, लेकिन इस नमी को बनाए रखने के लिए जमीन की मिट्टी की गहरी जुताई की जाती है और नलिकाओं को भी तोड़ दिया जाता है। इससे सिंचाई के भी पौधों की जड़ें नमी सोखती रहती है।