Beneshwar Dham Dungarpur: इन दिनों प्रयागराज में महाकुंभ मेला लगा हुआ है। जहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और त्रिवेणी संगम में स्नान कर रहे हैं। त्रिवेणी संगम में गंगा, यमुना और सरस्वती पवित्र नहीं मिलती हैं। जिसमें स्नान करने मात्र से सारे पाप धुल जाते हैं। राजस्थान के डूंगरपुर जिले में भी त्रिवेणी संगम है, जहां माघ के पूर्णिमा तिथि को एक बड़े मेले का आयोजन होता है। जिसे आदिवासियों के प्रयाग कहते हैं।
अलग-अलग राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
बेणेश्वर धाम के इस पवित्र त्रिवेणी में सोम, माही और जाखम नदियां मिलती हैं। यहां हर साल राष्ट्रीय बेणेश्वर मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त यहां आकर अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियों का विसर्जन भी करते हैं। त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन भी करते हैं।
तीन सौ साल से लग रहा मेला
बेणेश्वर धाम बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 45 किलोमीटर दूर स्थित है। जहां लगभग 300 सालों से माघी मेला लगता आ रहा है। संत मावजी महाराज और बेणेश्वर की कथाएं प्रचलित है। यह मेला भगवान शिव को समर्पित है। यहीं पास ही एक विष्णु मंदिर भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान विष्णु के अवतार माव जी ने इसी जगह तपस्या की थी।
आदिवासी संस्कृति की दिखती है झलक
बेणेश्वर धाम मेले में धार्मिक आस्थाओं का संगम दिखता है। यहां आदिवासी संस्कृति और परंपरा भी दिखाई देती है। मेले में धार्मिक अनुष्ठान और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। यहां सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी जाती है। बेणेश्वर धाम पर प्रवाहित होने वाली सोम, जाखम और माही नदी प्रयागराज संगम के समान पवित्र है। मरने के बाद अपने परिजनों की अस्थियां भी इसी संगम में विसर्जित की जाती हैं। मान्यता है कि इससे उनके आत्मा को शांति मिलती है।