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Gantholi Village Holi: राजस्थान के भरतपुर में एक गांठौली गांव है, इस गांव के गुलाल कुंड में राधा कृष्ण के होली खेले जाने के प्रमाण मिलते है।

Gantholi Village Holi: होली एक ऐसा त्यौहार है, जो केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। वहीं हम बात करें की कौनसे कुछ ऐसे धार्मिक स्थानों के बारे में होली को लेकर सभी लोगों की आस्था इन प्रसिद्ध स्थानों से जुड़ी हुई हैं। 

भरतपुर जिले के डीग बॉर्डर से पास स्थित गांठौली गांव का गुलाल कुंड को लेकर एक ऐसी कहानी है, जिसमें गुलाल कुंड को लेकर प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते है कि वहां राधाकृष्ण होली की लीला रचाने आया करते थे, इस कहानी में राधाकृष्ण द्वारा प्रसिद्ध होली खेले जाने को लेकर लोगों का अटूट विश्वास है।

स्थानीय निवासियों का दावा

गांठौली गांव में रहने वाले स्थानीय निवासियों द्वारा ये दावा किया जाता है कि इस गुलाल कुंड में राधाकृष्ण के साथ राधा रानी की सखियां भी होली के रंग में रंगती थी। कई पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इस गांव का नाम गांठौली रखे जाने के पीछे की कारण भी होली के त्यौहार से जुड़ी लीला से है।

कैसे पड़ा गांठौली गांव का नाम

भरतुपर के गांठौली गांव में निवास करने वाले गांव वालो का मानना है कि जब राधाकृष्ण गोपियों के संग होली खेलकर थक गए थे, तब गोपियों अर्थात् सखियों ने उनकी ठिठोली करना शुरू कर दिया।

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राधाकृष्ण सिंहासन पर बैठे हुए थे, उसी समय सखियों द्वारा राधा की चुनरी के साथ श्रीकृष्ण के अंगवस्त्र से बांधकर गांठ लगा दी। सखियों के गांठ लगाए जाने के बात इस लीला के कारण इस गांव का नाम गांठौली पड़ा। 

गुलाल कुंड की कहानी

गांठौली गांव में सखियों द्वारा गांठ बाधंने पर गांव का नाम गांठौली पड़ा, वही जहां सखियों ने  राधा रानी और श्री कृष्ण के साथ जिस कुंड में रंगों से खेलने के दौरान अबार गुलाल उड़ाया था। उसे आज के समय में गुलाल कुंड क नाम से जाना जाने लगा हैं।

इस कुंड को लेकर एक और किस्सा है, जिसमें स्थानिय लोगों द्वारा ये बताया जाता है कि इसी कुंड में  होली खेले जाने के बाद राधा रानी  कृष्ण ने अपने भीगे हुए कपड़े धोए थे।

होली के अवसर पर पारंपरिक खेल 

भरतपुर के इस गांव में इस बार भी भक्त होली का लुप्त उठाने के लिए यहां आना भी शुरू हो गए है और प्रशासन की तरफ से भी लोगों की व्यवस्था को लेकर तैयारी करवाना शुरू कर दी है।

इस गांव होली के अवसर पर पारंपरिक खेलों जैसे कबड्डी, रस्साकस्सी,  मटका दौड़ जैसे कई खेलो का आयोजन करवाया जाता है व इसके साथ ही होली वाले दिन दोपहर 12 बजे से डीग के महल में रंगोली, मेंहदी, चित्रकला और भी कई प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जाएंगा। 

लोकसंस्कृति के नृत्यों का प्रदर्शन

इस अवसर पर डीग के महल में शाम के शाम 4 बजे रंग बिरंगे फव्वारे और ब्रज की लोकसंस्कृति को समर्पित विभिन्न नृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें मयूर नृत्य, कालबेलिया नृत्य, ढोला वादन, कच्छी घोड़ी नृत्य के साथ बहरूपिया कला की भी प्रस्तुति करवायी जाएंगी। 

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