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Navratri 2025: जयपुर से करीब 110 किलोमीटर दूर सीकर जिले में स्थित जीण माता मंदिर में आज से लक्खी मेला की शुरूआत होगी जो कि 9 दिनों तक चलेगा। इस नौ दिवसीय मेले में देशभर से लाखों श्रध्दालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Navratri 2025: आज यानी 30 मार्च 2025 को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है, इस दिन से चैत्र नवरात्र की शुरूआत मानी जाती है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से क़रीब 110 किलोमीटर दूर सीकर जिले में स्थित जीण माता मंदिर में आज से लक्खी मेला की शुरूआत होगी जो कि 9 दिनों तक चलेगा। इस नौ दिवसीय मेले में देशभर से लाखों श्रध्दालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर अपने चमत्कार के लिए जाना जाता है।
कभी चढ़ाई जाती थी शराब
आपको बता दें इस मंदिर में पहले पशु बलि और शराब चढ़ाने की परंपरा थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। कहते हैं कि इस मंदिर में शीश झुकाने से सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में आने मात्र से ही अनेक रोग ठीक हो जाते हैं।
औरंगज़ेब ने किया था आक्रामण
जीाण माता मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर को तोड़ने मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपनी सेना को भेजा था। तब यहां उपस्थित भक्तों ने तो इसे बचाने का प्रयास किया लेकिन उसके बाद मुगल सेना पर अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। जिससे घबराकर औरंगजेब की सेना भाग गई।
औरंगज़ेब भी हुआ नतमस्तक
इस घटना के बाद मुगल बादशाह खुद जीण मंदिर में आया और क्षमा याचना मांगते हुए मां जीण भवानी को चांदी का छत्र भेंट किया। साथ में दिल्ली से अखंड ज्योति को जलाने के लिए सवा मन तेल भेजा।

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भाई - बहन के रिश्ते की पहचान
एक अन्य मान्यता के अनुसार चुरू जिले के घांघू गांव के चौहान राजघराने में जीण नामक कन्या का जन्म हुआ। किसी कारण से वो कन्या अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों में चली गई। उसके पीछे - पीछे उसका भाई हर्ष भी पहुंचा और घर वापस चलने को कहा। लेकिन जीण वहीं, बैठकर तपस्या में लीन हो गई। इसके बाद हर्ष भी कुछ दूर जाकर तपस्या करने लगा। यही कारण है कि जीण माता मंदिर  से 17 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों में हर्षनाथ मंदिर स्थित है।

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