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Kotputli Bhairu ji Lakhi Fair: कोटपूतली छापला भैरू जी मंदिर के लक्खी मेले की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस बार मेले में 551 क्विंटल महाप्रसाद बनाया जा रहा है। इसे बनाने में पिछले कई दिनों से सैकड़ों ग्रामीण जुटे हुए हैं।

Kotputli Bhairu ji Lakhi Fair: कोटपूतली-बहरोड़ के गांव कुहाड़ा स्थित छापला भैरू जी मंदिर का लक्खी मेला 30 जनवरी से शुरू हो चुका है। इसको लेकर ग्रामीणों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले को लेकर कल्याणपुरा और कुहाड़ा गांव के लोग काफी उत्सुक हैं। यहां के ग्रामीण पिछले एक महीने से लक्खी मेले के सफल आयोजन के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

मालूम हो कि मेला शुरू होने से पहले ही यह देशभर की मीडिया और सोशल मीडिया में आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां 551 क्विंटल महाप्रसाद बनाया जा रहा है। इसे बनाने में जेसीबी और थ्रेसर मशीन की मदद ली जा रही है। इसके अलावा सैकड़ों ग्रामीणों की आस्था और समर्पण इसमें शामिल है।

लक्खी मेले के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आपको बता दें कि अरावली पर्वतों के बीच कुहाड़ा गांव में छापला भैरू जी मंदिर स्थित है। यहां की हरियाली लक्खी मेले की खूबसूरती में चार चांद लगा रही है। लक्खी मेला  में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए स्थानीय लोगों द्वारा विशेष पार्किंग व्यवस्था की गई है। ताकि किसी भी वाहन स्वामी को पार्किंग को लेकर असुविधा का सामना न करना पड़े।

हालांकि मेले को लेकर स्थानीय जिला पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम की तैयारी देखने को मिल रही है। खबर है कि मेले में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब चार थानों का पुलिस बल तैनात रहेगा। वहीं मेले में भारी भीड़ आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की ओर से कई पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बताया गया है कि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड आदि संसाधन तैनात रहेंगे।

बिना हलवाई के तैयार हो रहा 451 क्विंटल महाप्रसाद

आपको बता दें कि मेले के अवसर पर आयोजित पूजा में श्री भैरुजी महाराज को 400 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया जाएगा। इसे बनाने का काम ग्रामीणों द्वारा पिछले कई दिनों से किया जा रहा है। इसमें करीब सैकड़ों ग्रामीण लगे हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक 200 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल शक्कर और 30 क्विंटल घी के मिश्रण से महाप्रसाद बनाया जा रहा है।

जानकारी हो कि महाप्रसाद बनाने में किसी हलवाई की मदद नहीं ली गई है। बल्कि इसे ग्रामीण खुद ही बना रहे हैं। हालांकि बाटियां सिकने के बाद कम्प्रेसर की मदद से सफाई का काम किया जा रहा है। बाद में थ्रेसर मशीन में इसे पीसा जा रहा है। फिर जीसीबी की मदद से 130 क्विंटल शक्कर और घी को चूरमे में मिलाने का काम चल रहा है। महाप्रसाद बनाते समय ग्रामीणों द्वारा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी लोग हाथ-पैरों पर पॉलीथिन पहनकर काम करते नजर आ रहे हैं। 

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