Maha-Kumbhabhishekam Rajasthan: राजस्थान की राजधानी जयपुर के वेशाली नगर, क्वींस रोड पर स्थित झाड़खंड महादेव मंदिर में पहली बार तीन दिवसीय महाकुंभाभिषेकम 31 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। बता दें कि द्रविड़ शैली में बना यह राज्य का एक मात्र मंदिर है। 12 साल में एक बार होने वाला यह कार्यक्रम जयपुर में पहली बार आयोजित होगा।
मंदिर में जोरो-शोरों से की जा रही है तैयारियां
जयप्रकाश सोमानी (बब्बू सेठ मेमोरियल ट्रस्ट, जयपुर के अध्यक्ष) ने जानकारी दी कि महाकुंभाभिषेकम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरूआत सुबह 8:30 बजे दक्षिण भारत के विद्वान आचार्य आर सुंदरमूर्ति तिरूचिरापल्ली के सान्निध्य में गणेश पूजा के साथ की जाएगी। यहां होने वाले हवन के पूजन सामग्री तमिलनाडु से मंगवाई गई है, साथ ही भारत की सात नदियों के जल से भगवान की पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं स्वर्ण शिखरों के अभिषेक से देव विग्रहों की पूजा की जाएगी।
थाईलैंड से मंगवाए गए है खास फूल
मंदिर में बने 51 फीट के गोपुरम में कलश स्थापित किया जाएंगा जिससे भगवान का अभिषेक होगा। मंदिर की खास बात यह है कि इसके चारों ओर 54 से अधिक देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित की गई है। साल 2007 में यहां एक विशाल नंदिर भी विराजमान किए गए थे। कार्यक्रम के लिए पांच कुंडीय यज्ञशाला भी तैयार की गई है।
इसके अलावा मंदिर को सजाने के लिए खास फूल थाईलैंड समेत अन्य देशों से मंगवाए गए है। यहां प्रति दिन 12 घंटे से ज्यादा विभिन्न अनुष्ठान किए जाएंगे। इस मंदिर में लगभग 125 साल से अखंड ज्यौति जल रही है। देश-विदेश से विद्वान और भक्त इस कार्यक्रम में शामिल होगें।
12 साल में एक बार मंदिर पवित्र करना है आवश्यक
एक बार मंदिर को ऊर्जान्वित करने के लिए पहला अनुष्ठान किया जाता है जिसके हर 12 साल बाद मंदिर को पविभ करना जरूरी माना जाता है। जितना अहम कुंभ स्नान को माना जाता है उतना ही विशेष महत्व महाकुंभाभिषेकम का भी होता है। मंदिर को पवित्र करने के लिए जीर्णोद्धार का मूल्यांकन होता है जिसके बाद खास मंत्रों और पूजा से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है।
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