Maha Shivaratri 2025: महाशिवरात्रि के खास मौके पर देशभर के प्राचीन शिव मंदिरों, द्वादश ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के भक्तों को आना जाना शुरू हो जाता है। इस दौरान देश विदेश से भी लाखों भक्त भोलेनाथ की पूजा करने के लिएशिव मंदिरों में जाते है। राजस्थान में भी भगवान शिव को समर्पित कई प्राचीन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। आज इस लेख में हम आपको राजस्थान के उन पांच ऐतिहासिक मंदिरों के बारे बताने जा रहे जहां केवल दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
1. घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, सवाई माधोपुर
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित है। भक्तों के लिए यह एक अहम तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव की परम भक्त सुदेहा और उसकी बहन घुश्मा की कहानी से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य आभा के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है। शिवरात्री और सावन के महीने में यहां लाखों भक्त की भीड़ दर्शन करने आती है।
2. कंठ महादेव मंदिर, अलवर
सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान अलवर के पास स्थित है नीलकंठ महादेव मंदिर जो भगवान शिव का एक पूजनीय मंदिर है। घने जंगलो और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों से घिरे इस मंदिर को 10वीं शताब्दी में बड़गुजर शासकों द्वारा बनवाया गया था। शिवरात्री के मौके पर यहां आकर भगवान का दर्शन करने से जीवन के सभी दुख खत्म हो जाते है।
3. हर्षनाथ मंदिर, सीकर
राजस्थान के सीकर के पास स्थित हर्षनाथ मंदिर भगवान भोलेनाथ का एक प्राचीन मंदिर है। हर्षनाथ पहाड़ियों के ऊपर बने इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था। इस मंदिर को नागर शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। खंडहर की स्थित में होने के बावजूद भी आज यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रतिक बना हुआ है। यहां का मनोरम दृश्य और शांत वातावरण भक्तों की यात्रा को आध्यात्मिक रूप से उत्थान करने वाला अनुभव बनाता है।
4. एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर
राजस्थान के उदयपुर शहर से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, एकलिंगजी मंदिर देश के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था। आश्चर्यजनक वास्तुकला और जटिल नक्काशी में बने इस मंदिर में भगवान शिव की चार-मुखी काले संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। शिवरात्री के मौके पर यहां हजारों की संख्या में भक्त भगवान का दर्शन करने आते है।
5.परशुराम महादेव मंदिर, पाली
अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर भगवान शिव का एक ऐतिहासिक मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने अपनी तपस्या खत्म होने के बाद किया था। भगवान के दर्शन करने के लिए भक्तों को पहले 500 सीढ़ियां चढ़नी होती है। माना जाता है यहां भगवान शिव से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
ये भी पढ़ें:- Beneshwar Dham Dungarpur: प्रयागराज के जैसे राजस्थान के इस जगह पर है त्रिवेणी संगम, जहां मिलती हैं तीन महत्वपूर्ण नदियां