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Daad Mata Mandir: राजस्थान के कोटा में दाढ़ माता का मंदिर स्थित है। वैसे तो यहां माता रानी के दर्शन करने श्रद्धालु आते रहते हैं, लेकिन नवरात्रि के समय यहां भक्तों का भी उमड़ता है। वास्तु कला की नगर शैली में दाढ़ माता मंदिर को बनाया गया है। मंदिर के परिसर में स्थित कुंड का पानी किसानों के लिए वरदान के समान है।

Daad Mata Mandir: राजस्थान के अलग-अलग शहर में देवी मां की कई मंदिर स्थित है। जिनकी अलग-अलग मान्यताएं भी हैं। इन मान्यताओं की वजह से देवी मां के मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। राजस्थान के इन्हीं खास मंदिरों में से एक है दाढ़ माता का मंदिर। जहां श्रद्धालुओं की ज्यादा की संख्या में भीड़ लगती है। लेकिन खास तौर पर यहां आम दिनों के मुकाबले नवरात्रि के समय श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। 

कहां स्थित है यह माता मंदिर?

प्राचीन दाढ़ माता का मंदिर शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर अपनी संस्कृति और विरासत के तौर पर भी जाना जाता है। इस प्राचीन मंदिर के स्थापित होने की बात करें तो, राजा-महाराजाओं के समय से इस मंदिर की पहचान बनी हुई है। माता की महिमा की मान्यता ऐसी है कि सिर्फ कोटा के श्रद्धालु ही नहीं बल्कि राजस्थान के श्रद्धालु भी माता के दर्शन करने आते हैं। माता के दर्शन के साथ ही उनके मन की मुराद भी पूरी हो जाती है।

जानिए क्या है मंदिर का इतिहास?

दाढ़ माता का मंदिर दसवीं शताब्दी में बना था। अपनी कुलदेवी के रूप में माता श्री दाढ़ देवी के इस मंदिर का निर्माण तंवर राजपूत ने किया था। मंदिर की स्थापना के कुछ समय बाद कोटा के महाराजा उम्मेद सिंह ने मंदिर के पास एक और मंदिर बनवाया। मंदिर के बनने के पश्चात राजा यह चाहते थे कि यह मूर्ति को इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाए। राजा के तमाम प्रयासों के बावजूद वह मंदिर को स्थानांतरित करने में असफल रहें। क्योंकि माता का मंदिर जिस जगह पर बनी हुई थी, वह जमीन पूरी तरह से फट गई। ऐसे में माता की मूर्ति जहां पहले स्थापित थी वहीं पर स्थापित कर दिया गया। इसके बाद से ही नवरात्रि के दिनों में यहां पर मेला लगता है।

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मंदिर के कुंड का पानी किसानों के लिए अमृत समान

इस मंदिर का निर्माण वास्तु कला की नागर शैली में बनाया गया है। वही मंदिर का मंच वर्गाकार है। जहां एक ओर श्रद्धालुओं अपनी मुराद को लेकर माता के दर्शन के लिए आते हैं। वहीं यह मंदिर किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के बीच में बने कुंड का पानी फसलों के लिए लाभदायक साबित होता है। ऐसा मानना है कि इस पानी से फसलों में कीड़े नहीं लगते हैं।

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