Mosques of Rajasthan: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति बहुरंगी संस्कृति और बहु-धार्मिक परंपराओं से भरा हुआ है। इस क्षेत्र में इस्लामी संस्कृति और सूफी परंपराओं का भी विशेष प्रभाव पड़ा है। राजस्थान में कई ऐसे प्रसिद्ध मस्जिद और मुस्लिम तीर्थ स्थल हैं, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाने जाते हैं।
अजमेर शरीफ दरगाह
गरीबों के नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को समर्पित अजमेर शरीफ की दरगाह राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भारत में सूफी परंपरा के सबसे प्रमुख संत माने जाते हैं। हर साल इस दरगाह में ख्वाजा साहब की पुण्यतिथि बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिनमें मुस्लिम और हिंदू दोनों शामिल होते हैं। ख्वाजा साहब ने 12वीं सदी के दौरान अजमेर में इस्लामी सूफी धर्म का प्रचार किया था। ख्वाजा साहब सहिष्णुता, मानवता और भाईचारे की शिक्षा देते थे।
जामा मस्जिद अजमेर
यह मस्जिद अजमेर शरीफ दरगाह के निकट स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण मुगल शासक शाहजहां द्वारा करवाया गया था। इस मस्जिद की संरचना सुंदर नक्काशी, झारखंडी हो और सफेद संगमरमर से बनी हुई है, जिसके आंगन में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा कर सकते हैं। अजमेर शरीफ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मस्जिद भी एक प्रमुख तीर्थ स्थल मानी जाती है।
गौस शाह की दरगाह
सूफी संत गौस शाह को समर्पित यह दरगाह नागौर में स्थित है। यहां हर साल उर्स के दौरान हजारों श्रद्धालु आते हैं, और इस अवसर पर सूफी कव्वाली और दुआओं का आयोजन किया जाता है। गौस शाह अपनी दयालुता और आध्यात्मिकता के लिए जाने जाते थे। इस दरगाह परिसर में स्थित हर-भरी बगीचे और संगमरमर की दीवारें इस दरगाह की खूबसूरती को चार चांद लगाने का कार्य करती हैं।
शाहजहां की मस्जिद
पुष्कर में स्थित इस मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा करवाया गया था। यह मस्जिद सफेद संगमरमर से बनी हुई है, जिस पर खूबसूरत इस्लामी नक्काशी करवाई गई है। पुष्कर वैसे तो हिंदू तीर्थ स्थलों के लिए काफी प्रसिद्ध है और कुछ आयोजनों पर हजारों लाखों की संख्या में हिंदू तीर्थ यात्री वहां की यात्रा भी करते हैं, किंतु पुष्कर में स्थित यह मस्जिद इस्लामी वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना भी पेश करती है, जो धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक मानी जाती है।
तारागढ़ दरगाह
मीरा सैयद हुसैन खंगसवार को समर्पित यह दरगाह अजमेर के तारागढ़ किले के पास स्थित है। मीरा सैयद हुसैन खंगसवार एक प्रसिद्ध सूफी योद्धा संत थे। यह जगह सूफी अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखती है। यहां हर गुरुवार को विशेष प्रार्थना की जाती है।
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