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Narayani Mata Mandir: राजस्थान के अलवर जिले से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित नारायणी माता का मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है। माना जाता है यहां बहती रहस्यमय धारा के जल से लोगों के चर्म रोग की बिमारी ठीक हो जाती है।

Narayani Mata Mandir: माता रानी के मशहूर तीर्थ स्थलों में से नारायणी माता का मंदिर राजस्थान के थानागाजी के बरवा की डूंगरी की तलहटी पर बना हुआ है। यह प्राचीन मंदिर अलवर जिले से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं दौसा जिले से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर टहला रोड पर बना हुआ है। माना जाता है कि इसी मंदिर में मां सती को शक्ति के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर को 11 वीं शताब्दी में खास प्रतिहार शैली से तैयार किया गया था। 

कई सालों पुराने इस मंदिर की मूर्ति के नीचे पानी की धारा बहती है। लोगों का कहना है कि यह जल गंगा नदी का है। अरावली पहाड़ियों के बीच बसे इस मंदिर में आज भी रहस्यमयी धारा बहती है। इस मंदिर के हर तरफ आपको पहाड़ियां ही पहाड़ियां दिखाई देगी। मानसून के सीजन में यहां काफी हरियाली देखने को मिलती है। 

पानी की धारा का रहस्य 

कहा जाता है कि इस मंदिर से निकलने वाली पानी की धारा गंगा नदी का पानी है। सावन के महीने में लोग इसी धारा के पानी को अपने कावड़ में रखकर लेकर जाते हैं। लोग इस समय दूर-दराज से कावड़ लेने यहां आते हैं और फिर कावड़ को शिवालय में जलाभिषेक करते हैं। लोगों को यहां भगवान शिव पर गंगा जल चढ़ाने के लिए जल मिल जाता है। 

सालों से बह रही है धारा

माना जाता है कि मंदिर की यह धारा कई वर्षों से बहती आ रही है। इतने सालों में अब तक इसके जल में आज तक कोई कमी नहीं देखी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस जल से कई तरह की चरम रोग की बीमारियां दूर हो जाती है। दूर-दूर से चर्म रोग से ग्रसित लोग यहां आकर अपनी बिमारी का इलाज कराते है। कहा जाता है केवल इस धारा में स्नान करने से इंसान की चर्म रोग की बीमारी दूर हो जाती है।

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