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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के गांगड़तलाई पंचायत समित के सोडला दूदा गांव ने ईसाइयत को सामूहिक रूप से त्याग और चर्च को मंदिर में बदलकर सनातन हिंदू धर्म में घर वापसी की है।

Rajasthan Banswara Church has Converted in a Hindu Temple: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के गांगड़तलाई पंचायत समिति के सोडला दूदा गांव के लोगों ने ईसाइयत को सामूहिक रूप से त्याग दिया है। सभी ग्रामवासी सनातन में सामूहिक घर वापसी कर अपनी परंपराओं से जुड़ गए हैं। इतना ही 30 साल पहले गांव में बने भैरूजी के मंदिर को चर्च में बदल दिया गया था। चर्च को मंदिर में बदलने हेतु फिर से भगवा रंग रोगन किया जा रहा है। उसे फिर से मंदिर बनाकर आज 9 मार्च 2025 को भैरूजी की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है।

जानें क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के तीर्थराज प्रयागराज में 144 साल बाद लगने वाले महाकुंभ से सनातन की ऐसी बयार बही कि इसका असर वहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के एक गांव में जाकर फूट पड़ा। बता दें गांव के 30 परिवारों के कुल 70 सदस्यों ने 6 महीने पहले एक कार्यक्रम में ईसाइयत को छोड़कर वापस सनातनी परम्पराओं में आस्था से जुड़ने का फैसला किया था। इसी क्रम में विगत माह 20 फरवरी को गांव वासियों ने महाकुंभ की दिव्यता से अभिभूत स्वेच्छा से चर्च को मंदिर बनाने का भी फैसला कर लिया। आज उस मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम के माध्यम से भैरूजी की प्राण प्रतिष्ठा को धूमधाम से किया जा रहा है।

पादरी ने भी की सनातन में वापसी

कभी चर्च में पादरी का काम करने वाले गौतम गरासिया ने भी सनातन में घर वापसी कर ली है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ से मिले सनातनी संस्कृति का संदेश मिलने के बाद देश और राजस्थान में भी बयार बह रही है। मैं भी पहले हिंदू था, लेकिन पादरियों ने मुझे पैसों तथा दवाईयों का लालच देकर ईसाइयत में धर्मांतरित कर दिया था। इससे मुझे और मेरे जीवन को कोई लाभ नहीं हुआ। अब मैंने जब से सनातनी हिंदू धर्म से वापसी कर जुड़ा हूं, मुझे मानसिक तथा आत्मिक दोनों शांति मिल रही है।

भजनलाल सरकार पेश कर चुकी कठोर धर्मांतरण बिल

बता दें राजस्थान की भजनलाल सरकार धर्मांतरण को लेकर इस विधानसभा बजट सत्र 2025 में विगत 3 फरवरी को राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 पेश कर चुकी है। इस विधेयक में जबरन अथवा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। दंड के रूप में 1-10 साल की जेल तथा 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान है।

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