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Rajsamand Torch Tradition: राजस्थान के राजसमंद शहर में होली के अवसर पर एक परंपरा निभायी जाती है, जिसमें रंगों से होली खेलने के बजाय मशालों को प्रज्वलित करके होली को मनाया जाता हैं। 

Rajsamand Torch Tradition: होली ऐसा त्यौहार है जो देश के सभी लोगों के द्वारा अपने अनोखे तरीको से मनाया जाता है। वहीं इन्ही होली की परंपराओं को राजस्थान के कुछ जिलों में एक अलग ढंग से निभाया जाता है। इन परंपराओं की वजह से ही विश्व भर में राजस्थान को जाना जाता हैं। 

राजस्थान में राजसमंद जिले के कांकरोली में स्थित द्वारकाधीश मंदिर की  होली को उसकी भव्य और रहस्यमय परंपरा की वजह से जाना जाता है। इस मंदिर में इस अवसर पर मशालों को जलाकर उनके बीच होली खेली जाती है, मशानों की ये परंपरा लोगों के लिए आस्था का केन्द्र है जिसे देखने के लिए हर साल होली के अवसर पर हजारों श्रद्धालु आते हैं।

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विशेष अनुष्ठान का आयोजन

राजसमंद के कांकरोली के द्वारकाधीश मंदिर में इस परंपरा को होली के एक दिन पहले एक विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जाता है, जिसमें विशाल मशालों को प्रज्वलित किया जाता है। मशानों को जलाने की ये परंपरा कई सालों से चलती हुई आ रही है। इस परंपरा के देखने के लिए राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के लोग आते हैं। 

बाल लीलाओं का जीवंत रूप

मशाल आयोजन में मंदिर के मुख्य आकर्षण राल दर्शन और चौरासी खंभ होते है, जिसका भक्तों द्वारा साल भर इंतजार किया जाता है और इसके साथ ही दूसरा आकर्षण फागोत्सव के समय श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत रूप में दिखाया जाता हैं। 

जयकारो से गूंजता परिसर

होली के एक दिन पहले निभाई जाने वाली में जलायी जाने वाली मशालों में से तेज लपटें उठने पर मंदिर परिसर में जय द्वारिकाधीश के जयकारे गूंजने लगते हैं। इस जयकारे को भक्तों द्वारा शुभ संकेत माना जाता हैं। श्रद्धालुओं के लिए राल दर्शन सबसे एक जरुरी आध्यात्मिक अनुभव होता है, क्योकि इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की झलक देखने के मिलती हैं। 

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