Shri Sanwariya Seth Temple : राजस्थान के चितौड़गढ़ जिले में सांवरिया सेठ मंदिर है। यह मंदिर दुनियाभर में अपनी सुंदरता और विशेष पहचान के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के दीवारों पर हिन्दू परंपरा का बेहद अनूठा चित्रकारी बनाया गया है। इस मंदिर में हर साल करोड़ों श्रद्धालु सवारिया सेठ के दर्शन के लिए आते हैं। आमतौर पर आपने सुना होगा कि मंदिर के पुजारी की सैलरी श्रद्धालुओं के दान दक्षिणा के ऊपर निर्भर करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं राजस्थान के सांवरिया सेठ मंदिर के पुजारी को कोई फिक्स सैलरी नहीं मिलती है। इनकी सैलरी एक परंपरा के अनुसार इनको मिलती है। इस अनोखी परंपरा के बारे में आइए जानते है ।
भंडार से जितने नोट उठा लें वही है वेतन
मंदिर के पुजारी का वेतन कई वर्षों से चली आ रही नियम के अनुसार मिलती है। मंदिर का जब भंडार खोला जाता है तब मंदिर के पुजारी अपने हाथों से एक बार में जितने नोट उठा लें वही उनकी वेतन है। मंदिर का भंडार साल में 9 बार अमावस्या पर एक बार और होली पर एक बार खोला जाता है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते हैं।
प्रतिदिन हजारों की संख्या में आते हैं श्रद्धालु
यह मंदिर न केवल मेवाड़ का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है बल्कि देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपने श्रद्धा अनुसार दान भी करते हैं। भक्त हर साल दान के रूप में सोना,चांदी लाखों करोड़ों रुपए दान करते हैं। इन राशियों का उपयोग धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है।सांवरिया सेठ को कृष्ण का धाम भी कहा जाता है। यहां श्रद्धालु अपने करियर,व्यापार और समृद्धि की मनोकामना लेकर आते हैं। कहा जाता है कि यहां दान करने से आर्थिक कठिनाई दूर होती है और वैभव का आशीर्वाद मिलता है।