rajasthanone Logo
Tradition Of Rajasthan: सिरोही जिले के आदिवासी समाज की एक अनोखी परंपरा विद्यमान है। समाज की महिलाएं विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ता रोककर वहां से आवाजाही करने वाले राहगीरों एवं वाहन चालकों से नारियल नेग मांगती हैं।

Tradition Of Rajasthan: राजस्थान सहित पूरे भारत देश में अनेक परंपराएं और रीति - रिवाज हैं जो बिल्कूल अलग अनोखी होती हैं। राजस्थान की संस्कृतियां और परंपराएं तो दुनिया भर में फेमस हैं। इस आर्टिकल में हम राजस्थान की एक ऐसी अनोखी परंपरा के बारे में जानेंगे, जिसका ख़ास संबंध शीतला सप्तमी से है।

रास्ता रोककर मांगती हैं नारियल
दरअसल, सिरोही जिले के आदिवासी समाज की एक अनोखी परंपरा विद्यमान है। समाज की महिलाएं विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ता रोककर वहां से आवाजाही करने वाले राहगीरों एवं वाहन चालकों से नारियल नेग मांगती हैं। यह नारियल नेग मिलने के बाद ही ये लोग वहां से गुजर सकते हैं।

होली से शुरू हो जाती है प्रथा
होली रंगों का त्यौहार माना जाता है। यह पर्व 5 दिनों तक मनाया जाता है। इन दिनों में लोग एक - दूसरे पर रंग - गुलाल लगाकर आपसी भाईचारे का परिचय देते हैं। सिरोही जिले के आदिवासी समाज में भी यह पर्व होली से शुरू होकर शीतला सप्तमी तक चलता है। इसे काजलिया प्रथा भी कहा जाता है।

परम्परागत गीत गाकर मांगती हैं नारियल
सिरोही जिले में आदिवासी बहुल आबूरोड एवं माउंटआबू उपखंड के भाखर अंचल एवं पिंडवाड़ा क्षेत्रों में महिलाएं ग्रुपों में एकत्रित होकर गांव की संपर्क सड़कों पर घूमती रहती हैं। उसके बाद जैसे ही कोई राहगीर एवं वाहन वहां से गुजरता है, ये महिलाएं उसके सामने आकर रोक लेती है। फिर परम्परागत गीत गाकर उनसे होली के नेग का नारियल मांगती हैं और जब तक नारियल नही मिलता राहगीर को आगे नहीं जाने दिया जाता।

और पढ़ें...Idana Mata of Udaipur: राजस्थान का अद्भुत मंदिर, जहां माता करती है अग्नि स्नान...भक्तों की है अटूट आस्था

प्रथा पर अंकुश लगाने की की गई कोशिश
समाज के शिक्षित एवं जागरूक लोगों की पहल के बाद इस प्रथा पर अंकुश लगा था। लेकिन, इस बार फिर कई स्थानों पर ये प्रथा देखने को मिल रही है। इस मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा भी लोगों को इस प्रकार से रास्ता रोककर वसूली नहीं करने की हिदायतें दी गई थी। लेकिन, उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

5379487