Tanot Mata Mandir: ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास, भक्त और भगवान के अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। भगवान का अस्तित्व केवल उनपर विश्वास मात्र से है लेकिन क्या हो जब यह अनूठा विश्वास यकीन में बदल जाए।
जी हां, हम देवी मां के एक ऐसे मंदिर की बात कर रहे हैं, जिसके सामने पाकिस्तान के जनरल भी माथा टेकते हैं। यह मंदिर भारत और पाकिस्तान के युद्ध का गवाह भी है। माता तनोट के नाम से ख्याति प्राप्त यह मंदिर जैसलमेर जिले में स्थित है।
भारी बमबारी के बावजूद,सुरक्षित रहें भारतीय सैनिक
पाकिस्तान के खिलाफ 1965 के युद्ध में, भारतीय सेना भारी दबाव में थी क्योंकि पकिस्तान की गोलीबारी का जवाब देने के लिए भारतीय जवानों के पास पर्याप्त हथियार नहीं थे। तभी पाकिस्तानी सेना ने इसका फायदा उठाया और साडेवाला चौकी के पास किशनगढ़ सहित बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया, जहां भारतीय सेना भारी संख्या में मौजूद थी। तमाम हमले के बावजूद साडेवाला के 13 ग्रेनेडियर्स अपनी लड़ाई लड़ते रहे है। जिसके बाद 17 नवंबर को तनोट माता मंदिर के पास चौकी पर गोलाबारी शुरू हो गई, लेकिन आश्चर्य में पर गए क्योंकि इस क्षेत्र में गिरे सारे ही बम बेअसर हो गए। इन हमलों में छोड़े गए एक भी बम विस्फोट नहीं हुआ।
पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ने माता को चांदी की छत्र की थी भेंट
कहा ये भी जाता है कि 1965 में पाकिस्तानी सेना ने करीब तीन हजार बम गिराए थे। बावजूद इसके मंदिर पर जरा भी प्रभाव नहीं पड़ा था। इतना ही नहीं बल्कि मंदिर के प्रांगण में करीब 450 बम गिराए थे जिसमें एक भी फटा नहीं था। आज भी ये बम मंदिर के संग्रहालय में सुरक्षित है। वहीं मां के चमत्कार को देखकर पाकिस्तानी के तत्कालीन ऑफिसर ब्रिगेडियर शाहनवाज खान काफी अचंभित हुए और उन्हें भारत सरकार से परमिशन लेकर माता को चांदी की छत्र भेंट की थी।
क्यों कहा जाता है 'सैनिकों की देवी?'
पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय माता ने भारतीय सैनिकों की रक्षा की थी। यही वो वजह है कि उन्हें सैनिकों की देवी और थार की वैष्णो देवी के नाम से जाना जाता हैं। माता के इस कृपा के बाद से सीमा सुरक्षा बल के सैनिक ही माता तनोट मंदिर में पूजा करते हैं। इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है बल्कि सीमा सुरक्षा बल के जवान ही माता तनोट की पूजा-अर्चना करते हैं।
क्या है मान्यताएँ?
जहां एक ओर लोग यहां पूजा अर्चना कर माता का आशीर्वाद लेने आते है। वहीं अपनी मन्नत पुरा के लिए भक्तगण माता के प्रांगण में सफेद रंग की रूमाल और लाल रंग की चुनरी बांधते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से माता श्रद्धालु की इच्छा पूरी कर देती हैं।