Bharatpur city: राजस्थान का भरतपुर पूरी दुनिया में कई ऐतिहासिक चीजों के लिए प्रसिद्ध है। इसे राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस शहर को राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार और पक्षियों का स्वर्ग आदि उपनामों से भी जाना जाता है।
भरतपुर शहर के मंदिर, ऐतिहासिक स्थल, किले और इसमें समाहित केवलादेव वन्य जीव अभ्यारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भरतपुर की प्रसिद्ध ब्रज होली की चर्चा तो देश-विदेश तक फैली हुई है। जिसमें जवानो से लेकर बूढ़े व्यक्ति तक सभी बम नृत्य में रंग जाते हैं।
भरतपुर शहर की करीबी शहरो से दूरी
यह शहर राजस्थान की राजधानी जयपुर से 180 किलोमीटर, अजमेर से करीब 310 किलोमीटर और भारत की राजधानी नई दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। यह अपनी सीमा अलवर, दोसा, करौली और धौलपुर से सांझा करता है, इसके साथ ही इस शहर की सीमा हरियाणा और उत्तर प्रदेश दो राज्यो से लगती है। ये शहर 5066 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
दशरथ पुत्र भरत के नाम पर शहर
यह शहर राजस्थान की सुंदर रंग-बिरंगी संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां के लोग भगवान श्री कृष्ण के ज्यादा दीवाने हैं। यह लोग अपने नृत्य और गाजे-बाजे के साथ भगवान को मोहित करते हैं और उनकी भक्ति करते हैं। भरतपुर शहर का नाम श्री रामचंद्र भगवान के भाई भरत के नाम पर रखा गया था और उनके दूसरे भाई लक्ष्मण यहां के राजपरिवारों के कुल देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
सौर ऊर्जा की मिल्क प्लांट
भरतपुर में ही राजस्थान की सबसे पहले सहकारी बैंक 1904 में यहां पर स्थापित की गई थी। राजस्थान का प्रथम सौर ऊर्जा चलित मिल्क प्लांट भी इसी शहर में स्थित है। यहां की सर्वाधिक साहसी जनजाति भी इसी शहर में पाई जाती है।
यहां के लोगों का पहनावा रंग-रंगीला है,जो अनेक सदियां बीत जाने के बाद भी यहां की वेशभूषा अपनी पहचान बनाए हुए हैं। इस शहर के पुरुष पोशाक में पगड़ी, अंगरखा, कुर्ता, पजामा, कमरबंद या पटका शामिल करते है और महिलाएं की पोशाक में घाघरा चोली कुर्ती और ओढ़नी शामिल है, जिनको पारंपरिक तरीके से पहनते हैं।
सूरजमल ने भरतपुर की स्थापना
इस शहर की स्थापना राज्य में मालवा डिब्बे तैयार करने के उद्देश्य से 31 जनवरी 1957 की गई थी। जिसमें राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र भी इसी शहर के सेवर नगर में स्थित है और इस सरसों अनुसंधान केंद्र की स्थापना राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर द्वारा 20 अक्टूबर 1993 में की गई थी। भरतपुर की स्थापना जाट राजा महाराजा सूरजमल ने लगभग 1733 ई में की थी और यहां पर जाटों का गढ़ हुआ करता था।
पूर्वी प्रवेश द्वार कहे जाने वाले भरतपुर शहर के मंदिर, महल, किले जाटों के कला कौशल को आज भी प्रत्यक्ष दर्शाते हैं। यह शहर पहले भरतपुर रियासत की राजधानी हुआ करता था। इसकी स्थापना ठाकुर चूड़ामण सिंह जाट ने की थी, किंतु बाद में भरतपुर के मुख्य शासक राजा सूरजमल में इस शहर को सजाया और संवारा था।
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