Sajjangarh Monsoon Palace: राजस्थान के उदयपुर में स्थित मानसून महल को राज्य को पानी के संकट से दूर करने के लिए बनाया गया था। इस महल की मदद से इस बात का पता लगाया जाता था कि मानसून कब से आने वाला है, ताकि बारिश के पानी को इकट्ठा कर लोगों में बांटा जा सके। किले की ऊंचाई से दुश्मनों के आने का भी पता लगाया जाता था।
इस किले को क्यों कहते है मानसून पैलेस?
उदयपुर के सज्जनगढ़ किले को मानसून पैलेस के नाम से जाना जाता है। यह लगभग 200 साल पुराना है। इस किले का निर्माण सज्जन सिंह के द्वारा कराया गया था। मानसून से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस किले का निर्माण किया गया था। मानसून आने का अनुमान करीब से दिखने वाले बादलों से लगाया जाता था, साथ ही इस समय पूरा किला ठंडा भी हो जाता था। इस किले की खूबसूरती को देखने लाखों लोग सालाना आते हैं। यहां एक टेलीस्कोप भी लगाया था, जिससे महाराणा सज्जन मानसून के समय बादलों को देखा करते थे।
944 मीटर ऊंचा है मानसून महल
इतिहासकारों के मुताबिक इस किले को फतेहसागर झील के पास बनाया गया है। महल को बनवाने की शुरुआत साल 1884 में महाराणा सज्जन सिंह ने की थी। 944 मीटर ऊंचे इस महल के निर्माण को पूरा कराने का कार्य शासक महाराणा फतेह सिंह ने किया था।
अनोखी वास्तुकला के लिए जाना जाता है किला
अरावलील पहाडियों में बने इस महल की रचना राजपूताना स्थापत्य शैली में की गई है। इस किले के मुख्य द्वार पर बनी नक्काशी और डिजाइन को देखने हजारों की संख्या में लोग आते हैं। साथ ही इस किले की छत पर बने सुंदर गुंबद और छतरियां इसे और भी आर्कषक बनाती है। किले को देखने आए पर्यटकों ट्रैकिंग का भी लुफ्त उठा सकते हैं। लोग पैदल भी चल सकते हैं, साथ ही सफारी का भी मजा ले सकते हैं। किले में आने की टिकट 110 रुपए प्रति व्यक्ति है।
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